Skip to main content

वनिता कासनियां पंजाब सहायता केंद्र vnitakasnia @mail.com नित्य लाइव दर्शन एवं साधना 👉 🚩जय श्री राम🚩जय श्री हनुमान Shri। Hanuman Chalisa By वनिता कासनियां पंजाब? ।। जय श्री सीताराम जी ।। दोहा : श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। चौपाई : जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।। महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा।। हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै।। संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।। विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।। लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।। सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।। जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।। तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना।। जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।। राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।। आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।। भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।। नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।। संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।। सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा। और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।। चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।। तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।। अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।। और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।। संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।। जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई।। जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।। दोहा : पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

 वनिता कासनियां पंजाब   सहायता केंद्र   vnitakasnia @mail.com




Shri।


 Hanuman Chalisa

By वनिता कासनियां पंजाब?

।। जय श्री सीताराम जी ।।






दोहा :

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई :

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

दोहा :

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

Comments

Popular posts from this blog

🚩🪴राष्ट्र हिंदू🪴🚩राष्ट्र हिंदू धर्म मेंमहर्षि मांडव्य - वो ऋषि जिन्होंने यमराज को भी श्राप दिया,माण्डव्य पौराणिक काल के एक महान ऋषि थे जिनके श्राप के कारण यमराज को भी मनुष्य का जन्म लेना पड़ा। वैसे तो यमराज सारे प्राणियों के कर्मों के आधार पर न्याय करते हैं इसीलिए उन्हें धर्मराज कहा जाता है किन्तु उन्होंने अनजाने में माण्डव्य ऋषि के साथ अन्याय किया जिसका दंड उन्हें भोगना पड़ा।महर्षि माण्डव्य भार्गव वंश के ऋषि थे और उनका एक नाम "अणीमाण्डव्य" भी कहा गया है। इनके विषय में कथा मत्स्य पुराण में दी गयी है। वे महर्षि मातंग और दित्तामंगलिका के पुत्र थे। उन्होंने अल्प आयु में ही बहुत सी सिद्धियां प्राप्त कर ली और ऋषियों में सम्मानित हो गए। उनका एक व्रत था कि संध्याकाल के तप के समय वे मौनव्रत धारण किये रहते थे।एक बार कुछ लुटेरे लूट का बहुत सारा सामान लेकर भाग रहे थे। उनके पीछे कई राजकीय सैनिक लगे थे जिनसे बचने के लिए वे भाग कर माण्डव्य ऋषि के आश्रम में छिप गए। थोड़ी देर बाद जब सैनिक वहां आये तो उन्होंने माण्डव्य ऋषि से उन लुटेरों के विषय में पूछा। मौन व्रत के कारण उन्होंने कुछ उत्तर नहीं दिया। तब जब सैनिक अंदर गए तो उन्हें लूट के सामान के साथ लुटेरे भी मिल गए। उन्होंने समझा कि ये ऋषि भी इनके साथ मिले हुए हैं इसी कारण वे लुटेरों के साथ ऋषि को भी पकड़ कर ले गए और राजा के सामने प्रस्तुत किया।राजा ने भी उनसे प्रश्न किया किन्तु मौन व्रत होने के कारण माण्डव्य ऋषि कुछ नहीं बोले। राजा ने इसे उनकी स्वीकृति समझा और सभी लुटेरों के साथ उन्हें भी सूली पर चढाने का आदेश दे दिया। सूली पर चढाने से अन्य लुटेरे तो तक्षण मर गए किन्तु माण्डव्य ऋषि अपने तप के बल पर कई दिनों तक बिना खाये-पिए जीवित रहे। शूल के अग्र भाग को "अणि" कहते हैं और तभी से वे "अणीमाण्डव्य" नाम से भी प्रसिद्ध हुए।जब राजा को इस चमत्कार के बारे में पता चला तो तो स्वयं नंगे पांव महर्षि के पास आये और उन्हें सूली पर से उतारा। फिर उन्होंने महर्षि से बारम्बार क्षमा मांगी। मांडव्य ऋषि ने ये सोच कर उसे क्षमा कर दिया कि राजा ने तो परिस्थिति के अनुसार न्याय किया। वे चुप-चाप वहां से चले गए। वे चले तो गए किन्तु एक बात उन्हें खाये जा रही थी कि उन्होंने कभी कोई पाप नहीं किया फिर किस कारण उन्हें ऐसा दंड भोगना पड़ा?इसका कारण जानने के लिए वे यमपुरी पहुंचे जहाँ यमराज ने उनका स्वागत किया। माण्डव्य ऋषि ने यमराज से पूछा कि उन्हें याद नहीं कि कभी उन्होंने कोई अपराध किया हो तो फिर किस कारण उन्हें ऐसा घोर दंड भोगना पड़ा? इस पर यमराज ने कहा - "हे महर्षि! बालपन में आपने पतंगों के पृष्ठ भाग में सींक घुसा दिया था जिस कारण आपको ये दंड भोगना पड़ा। जिस प्रकार छोटे से पुण्य का भी बहुत फल प्राप्त होता है उसी प्रकार छोटे से पाप का भी फल अधिक ही मिलता है।यह सुनकर माण्डव्य ऋषि ने यमराज से पूछा कि मैंने ये अपराध किस आयु में किया था? तब यमराज ने उन्हें बताया कि उन्होंने ये कार्य १२ वर्ष की आयु में किया था। इसपर माण्डव्य अत्यंत क्रोधित हो यमराज से बोले - "हे धर्मराज! शास्त्रों के अनुसार मनुष्य द्वारा १२ वर्ष तक किये कार्य को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता क्यूंकि उस आयु में उन्हें पाप पुण्य का ज्ञान नहीं होता। किन्तु तुमने बालपन में किये गए मेरे अपराध के कारण मुझे इतना बड़ा दंड दिया इसीलिए मैं तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम मनुष्य योनि में शूद्र वर्ण में एक दासी के गर्भ से जन्मोगे।"तब यमराज ने उनसे प्रार्थना की तो उन्होंने उन्हें बताया कि अगले जन्म में वे सारे संसार में प्रसिद्ध होंगे। उसके अतिरिक्त माण्डव्य ऋषि ने एक नयी मर्यादा स्थापित की जिसमें उन्होंने आयु सीमा को बढ़ा कर १४ वर्ष कर दिया। अब १४ वर्ष तक के बच्चों को अपने किये आचरण के कारण दंड से अभय मिल गया। माण्डव्य ऋषि के श्राप के कारण ही धर्मराज द्वापर में महर्षि वेदव्यास की कृपा से अम्बा की दासी पारिश्रमी के गर्भ से विदुर के रूप में जन्में। वे अपने काल के महान राजनीतिज्ञ और हस्तिनापुर के महामंत्री बनें।माण्डव्य ऋषि के सन्दर्भ में एक और कथा का वर्णन आता है जो सती कौशिकी के सम्बन्ध में है। कौशिकी नाम की एक सती स्त्री थी जिनके पति का नाम कौशिक था जो अपंग थे। एक दिन रात्रि में वे कही जा रहे थे और अँधेरे के कारण वे तपस्यारत महर्षि माण्डव्य से टकरा गए जिससे उनकी तपस्या भंग हो गयी। इससे क्रुद्ध होकर माण्डव्य ऋषि ने कौशिकी को श्राप दे दिया कि अगले सूर्योदय पर वो विधवा हो जाएगी।कौशिकी अनेकों सिद्धों के पास गयी पर सभी ने माण्डव्य ऋषि के श्राप को विफल करने में असमर्थता दिखलाई। तब वे माता पार्वती की शरण में गयी जिन्होंने आकाशवाणी के माध्यम से उन्हें बताया कि वे अपने सतीत्व की शक्ति का प्रयोग करे। सूर्योदय से कुछ समय पूर्व यमदूत कौशिकी के सम्मुख आ गए किन्तु उसने दसो दिशाओं को साक्षी मान कर कहा कि यदि वो सच में सती है तो अब सूर्योदय ही नहीं होगा। सूर्यदेव कौशिकी के सतीत्व की रक्षा के कारण रुक गए।सूर्य की गति रुकने से सारे जगत में हाहाकार मच गया। देव त्रिदेवों के पास गए जिन्होंने उन्हें माता अनुसूया से सहायता मांगने को कहा। तब देवों की प्रार्थना पर अनुसूया कौशिकी के पास आयी और उसकी सराहना करते हुए सूर्य को मुक्त करने को कहा। उन्होंने कौशिकी को विश्वास दिलाया कि वे उसके पति के प्राणों की रक्षा करेंगी। उनके आश्वासन पर कौशिकी ने सूर्य को मुक्त कर दिया।सूर्योदय होते ही यमदूत कौशिक के प्राण लेने को आगे बढे किन्तु माता अनुसूया के सतीत्व के कारण वे ऐसा नहीं कर सके। तब यमराज के अनुरोध पर माता अनुसूया ने अपने सतीत्व का कुछ भाग देकर कौशिकी को महर्षि माण्डव्य के श्राप से मुक्त कर दिया और कौशिक की रक्षा की। इस प्रकार संसार ने दो सतियों का प्रताप एक साथ देखा।बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम

🚩🪴राष्ट्र हिंदू🪴🚩 राष्ट्र हिंदू धर्म में महर्षि मांडव्य - वो ऋषि जिन्होंने यमराज को भी श्राप दिया , माण्डव्य पौराणिक काल के एक महान ऋषि थे जिनके श्राप के कारण  यमराज  को भी मनुष्य का जन्म लेना पड़ा। वैसे तो यमराज सारे प्राणियों के कर्मों के आधार पर न्याय करते हैं इसीलिए उन्हें धर्मराज कहा जाता है किन्तु उन्होंने अनजाने में माण्डव्य ऋषि के साथ अन्याय किया जिसका दंड उन्हें भोगना पड़ा। महर्षि माण्डव्य भार्गव वंश के ऋषि थे और उनका एक नाम  "अणीमाण्डव्य"  भी कहा गया है। इनके विषय में कथा मत्स्य पुराण में दी गयी है। वे महर्षि मातंग और दित्तामंगलिका के पुत्र थे। उन्होंने अल्प आयु में ही बहुत सी सिद्धियां प्राप्त कर ली और ऋषियों में सम्मानित हो गए। उनका एक व्रत था कि संध्याकाल के तप के समय वे मौनव्रत धारण किये रहते थे। एक बार कुछ लुटेरे लूट का बहुत सारा सामान लेकर भाग रहे थे। उनके पीछे कई राजकीय सैनिक लगे थे जिनसे बचने के लिए वे भाग कर माण्डव्य ऋषि के आश्रम में छिप गए। थोड़ी देर बाद जब सैनिक वहां आये तो उन्होंने माण्डव्य ऋषि से उन लुटेरों के विषय में पूछा। मौन व्...

कट्टर हिन्दू,,इस सन्देश को हर भारतीय तक पहुंचाओ By वनिता कासनियां पंजाब* 🤔कुछ तो करना ही होगा*▪️"मतदाता गलत, ▪️देश की संसद गलत, ▪️प्रधानमंत्री गलत,▪️मंत्रिमंडल गलत,▪️लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनी गई पूरी सरकार गलत,▪️कृषि कानून गलत,▪️370 का हटना गलत, ▪️जी एस टी गलत,▪️मेक इन इंडिया गलत,▪️आत्मनिर्भर भारत गलत,▪️राम मंदिर गलत,▪️घुसपैठियों को हटाने के लिये कानून गलत,▪️राफेल गलत,▪️सर्जिकल स्ट्राइक गलत,▪️एयर स्ट्राइक गलत,▪️सर्वोच्च न्यायालय गलत,▪️सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति गलत,▪️समिति के सदस्य गलत▪️जीयो गलत,जीयो का टॉवर गलत▪️पतंजली गलत,रामदेव गलत,▪️मीडिया गलत, ▪️वैक्सीन गलत,*🤦🏻‍♂️भारत देश ही गलत, बस सही है तो*...🔹सारे रास्तों पर डेरा जमाये आंदोलनकार सही🔹लोगों का रास्ता रोके आंदोलनकारी सही🔹ऐश करते आंदोलनकारी, राकेश टिकैत, वामपंथी, शाहीन बाग सही🔹परिवारवादी पार्टियाँ, चीन, पाकिस्तान, घुसपैठिये, खालिस्तानी, विघटनकारी, टुकड़े-टुकड़े गैंग, दंगाई, लुटियन्स गैंग, आतंकवादी, विदेशी फण्डिंग पर पल रहे देशद्रोही, तुष्टिकरण, अवार्ड वापसी गैंग, नशेड़ियों की जमात, सही ✊ *राष्ट्रहित में आह्वान युवाओं के मन मे एक प्रश्न का बना हुआ था कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? अब इसका उत्तर मिल गया है और सिनेमा चला भी अच्छा है जो चलना ही चाहिऐ था।अब इस देश के लिए ये जानना जरूरी है कि*💐नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को क्यूँ और किसने मारा?💐अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की मुखबरी किसने की थी? 💐 लाल बहादुर शास्त्री को किसने और क्यों मारा? 💐महात्मा गांधी की हत्या के वह कारण क्या थे?💐डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी की हत्या क्यों और किसने की?*युवाओं! ज़रा विचारो कि कहाँ कहाँ गलतियां हुई हैं..* *🤷🏻‍♂️काल्पनिक चरित्र कटप्पा से बाहर निकलो और वो पूछो जो तुमसे जुड़ा हुआ है.....*💐पता करो कि हम लगभग 800 साल तक गुलाम क्यों रहे?💐पता करो कि जो देश आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक और वैज्ञानिक रूप से सशक्त था.. विश्व गुरु था...वो सब ज्ञान कहाँ और कैसे खत्म हो गया? कौन इसके लिये जिम्मेदार था? 💐पता करो कि ईरान से इंडोनेशिया तक की भारतवर्ष की सीमाएं सिकुड़ कर इतनी छोटी कैसे हो गई कि हमें कश्मीर से भी भगा दिया गया? 💐पता करो कि सोने की चिड़िया के पंख कैसे कतर दिए गए?💐पता करो कि गुरु गोबिंद सिंह जी के मासूम बेटों को जिंदा दीवाल में क्यों चुनवा दिया गया?💐पता करो कि महाराणा प्रताप को घास की रोटी क्यों खानी पड़ी?💐पता करो कि वीर मराठों की सेना पानीपत की तीसरी लड़ाई में अब्दाली से क्यों हार गई?💐पता करो कि झांसी की रानी वीरांगना लक्ष्मीबाई को किनके गद्दारी का दुष्परिणाम भुगतना पड़ा?💐पता करो कि वीरो की धरती होते हुए भी हम गुलाम क्यों हुए, हमारी माँ-बहनों को अपमान के आग में क्यों जलना पड़ा?💐पता करो कि बिना किसी समर्थन के भी नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री कैसे बन गए?💐पता करो कि पाकिस्तान का स्थायी रोग किसने भारत को दिया? तब हुआ क्या-क्या था?💐पता करो कि कश्मीर को नासूर बनाने का बीज किस ने क्यों और कैसे बोया..?💐पता करो कि नेपाल के महाराजा के भारत में विलय के प्रस्ताव को 1952 में किस ने क्यों ठुकरा दिया था?💐पता करो कि 1953 में UNO में भारत को स्थायी सीट देने के स्वयं अमेरिका के प्रस्ताव को क्यों भुला दिया था? और वह सदस्यता चीन को क्यों दिला दी?💐पता करो कि सेना को हत्यारा, नक्सलियों को क्रांतिकारी व जिहादी आतंकवादियों को भटका हुआ बेरोजगार नौजवान कहने वाला देश का सांसद कैसे बन गया?💐पता करो कि माँ दुर्गा को वेश्या कहने का साहस किसी को कहाँ से मिलता है? 💐पता करो कि देवी देवताओं के नंगी तस्वीर बनाने वालों को समर्थन कौन देता है?💐पता करो कि आतंकवादी याकूब की फांसी रोकवाने के लिये आधी रात के बाद भी सुप्रीम कोर्ट को खोलने के लिये कौन मजबूर कर देता है?💐पता करो कि देश की दुर्दशा के लिये कौन जिम्मेदार है?*💐आप ख़ुद बाहुबली बनकर कारण जानो कि हमारा कैलास पर्वत और मानसरोवर तीर्थ चीन के हिस्से में व ननकाना साहेब पाकिस्तान के हिस्से में किस की ग़लती से कैसे चले गए?**🤨और भी बहुत सारी गलतियां हैं हे_युवा_देश...!**अपनी दिशा और दशा बदलो। यह समय मज़ाक़ों का नहीं है, वह करो जो करणीय है। चिन्तन का विषय है। "हम क्या थे, क्या हो गए और क्या होंगे। अभी आओ विचारे मिल कर ये समस्याएं सभी।" हम सबका कर्तव्य है कि इतिहास की गलतियों का विवेचना करें देशहित में और भविष्य में उन गलतियों को न दोहराने का प्रण ले, तब ही हमारी मातृभूमि, हमारी संस्कृति, हमारा धर्म सशक्त, समृद्ध व सम्मानित होगा।**🤦🏻‍♂️"जो सेक्युलर जाहिल कहते है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।**जा कर देखो, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश में बस्ती दिखती नहीं तुम्हारी।।"**वंदे मातरम🚩*🙏🚩🇮🇳🔱🏹🐚🕉️

कट्टर हिन्दू,, इस सन्देश को हर भारतीय तक पहुंचाओ By वनिता कासनियां पंजाब *🤔कुछ तो करना ही होगा* ▪️"मतदाता गलत,  ▪️देश की संसद गलत,  ▪️प्रधानमंत्री गलत, ▪️मंत्रिमंडल गलत, ▪️लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनी गई पूरी सरकार गलत, ▪️कृषि कानून गलत, ▪️370 का हटना गलत,  ▪️जी एस टी गलत, ▪️मेक इन इंडिया गलत, ▪️आत्मनिर्भर भारत गलत, ▪️राम मंदिर गलत, ▪️घुसपैठियों को हटाने के लिये कानून गलत, ▪️राफेल गलत, ▪️सर्जिकल स्ट्राइक गलत, ▪️एयर स्ट्राइक गलत, ▪️सर्वोच्च न्यायालय गलत, ▪️सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति गलत, ▪️समिति के सदस्य गलत ▪️जीयो गलत,जीयो का टॉवर गलत ▪️पतंजली गलत,रामदेव गलत, ▪️मीडिया गलत,  ▪️वैक्सीन गलत, *🤦🏻‍♂️भारत देश ही गलत, बस सही है तो*... 🔹सारे रास्तों पर डेरा जमाये आंदोलनकार सही 🔹लोगों का रास्ता रोके आंदोलनकारी सही 🔹ऐश करते आंदोलनकारी, राकेश टिकैत, वामपंथी, शाहीन बाग सही 🔹परिवारवादी पार्टियाँ, चीन, पाकिस्तान, घुसपैठिये, खालिस्तानी, विघटनकारी, टुकड़े-टुकड़े गैंग, दंगाई, लुटियन्स गैंग, आतंकवादी, विदेशी फण्डिंग पर पल रहे देशद्रोही, तुष्टिकरण, अवार्ड वाप...

🌄⛳⛳🚩🚩जाग सनातन जाग🚩🚩⛳⛳🌄🙏🙏🙏⛳माँ से कर अनुराग🙏🙏🙏⛳माँ ममता की मूरत है 🙏🙏🙏🙏माता ही महान 🙏⛳⛳⛳माँ हम सबकी जान ह...🚩🚩बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम 🚩🌹🙏🙏🌹Check this post from Vnita :"🌄⛳⛳🚩🚩जाग सनातन जाग🚩🚩⛳⛳🌄🙏🙏🙏⛳माँ से कर अनुराग🙏🙏...",

🌄⛳⛳🚩🚩जाग सनातन जाग🚩🚩⛳⛳🌄 🙏🙏🙏⛳माँ से कर अनुराग 🙏🙏🙏⛳माँ ममता की मूरत है  🙏🙏🙏🙏माता ही महान  🙏⛳⛳⛳माँ हम सबकी जान ह... 🚩🚩बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम 🚩🌹🙏🙏🌹 Check this post from Vnita :"🌄⛳⛳🚩🚩जाग सनातन जाग🚩🚩⛳⛳🌄 🙏🙏🙏⛳माँ से कर अनुराग 🙏🙏..." ,